Wednesday, October 9, 2013

कैसा पाठ्यक्रम ?

बचपन मेँ कभी सैनिक वीर अब्दुल हमीद की बहादुरी के किस्से स्कूल की किताबों मेँ पढ़े थे। शायद उनके बाद कभी किसी सिलेबस का हिस्सा हमारे सैनिक नहीं रहे।

बर्फीले तूफानोँ मेँ हमारे सैनिक देश की सुरक्षा मेँ तैनात है। पाकिस्तान और चीन के साथ युद्ध और बाहरी आतँकवादियोँ से लड़ते हुए हमारे न जाने कितने सैनिक शहीद हुए। उनकी बहादुरी के किस्से मुझे कभी अपने स्कूली पाठ्यक्रम मेँ पढ़ने को नहीँ मिले। इस बात का अफसोस भी है।

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पढ़ाई लिखाई के हिसाब से कला स्नातक और पेशे से शिक्षा मित्र हूँ।

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